
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। आज वे गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करेंगे। सुबह करीब साढ़े 11 बजे वे समर्थकों के साथ विधानसभा पहुंचेंगे और औपचारिकताएं पूरी करेंगे। यह सिर्फ एक नामांकन नहीं यह सत्ता के समीकरण बदलने का संकेत है।
37 सीटों की लड़ाई, बिहार पर खास नजर
2 अप्रैल को राज्यसभा की 37 सीटें खाली हो रही हैं। इन्हें भरने के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। आज नामांकन की आखिरी तारीख है, 9 मार्च तक वापसी और 16 मार्च को मतदान व उसी दिन नतीजे। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल कई राज्यों में राजनीतिक शतरंज बिछ चुकी है। लेकिन सबसे ज्यादा नजरें बिहार पर टिकी हैं।
बिहार की सत्ता का रीसेट बटन?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद पटना में नया पावर सेंटर बनेगा। चर्चा है कि इस बार मुख्यमंत्री की कुर्सी BJP के खाते में जा सकती है। JDU के भीतर हल्की नाराजगी की खबरें हैं, लेकिन हाईकमान की सहमति के बाद मामला शांत बताया जा रहा है। सियासी गलियारों में एक और चर्चा क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की एंट्री से नई राजनीतिक विरासत की शुरुआत होगी?
CM रेस: पांच चेहरे, एक कुर्सी
अगर BJP का मुख्यमंत्री बनता है, तो दावेदारों की लंबी लाइन है:
- नित्यानंद राय
- सम्राट चौधरी
- विजय सिन्हा
- दिलीप जायसवाल
- संजीव चौरसिया
हर नाम के पीछे अपना जातीय और राजनीतिक गणित है। सवाल सिर्फ चेहरा नहीं—संतुलन का है।

JDU-BJP फार्मूला: डिप्टी CM का गेम
सियासी सूत्रों के मुताबिक, अगर BJP को CM पद मिलता है तो JDU को दो डिप्टी CM पद दिए जा सकते हैं। यह पावर शेयरिंग मॉडल बिहार में पहली बार देखा जा सकता है। यानी कुर्सी एक, लेकिन ताकत कई हिस्सों में बंटी।
क्या बदलेगा बिहार का सियासी नक्शा?
नीतीश कुमार का दिल्ली जाना सिर्फ पद परिवर्तन नहीं यह बिहार की राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। Patna की राजनीति अब गठबंधन संतुलन, जातीय समीकरण और दिल्ली की रणनीति के बीच झूलेगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह बदलाव ‘स्मूद ट्रांजिशन’ होगा या ‘सियासी भूचाल’।
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